पुणे के पास बेस्ट मानसून ट्रेक: झरने, जंगल और किले
पुणे से एक दिन के सात मानसून ट्रेक, आसान झरना ट्रेक से लेकर किला-और-घाट वाले डबल ट्रेक तक, हर एक की श्रेणी और किसके लिए सही है।

जून से सितंबर तक सह्याद्रि हरा-भरा हो जाता है, हर खाई झरना बन जाती है और जंगल की पगडंडियाँ नालों से भर जाती हैं। ये वे मानसून ट्रेक हैं जो हम पुणे से कराते हैं। सभी एक दिन के ट्रेक हैं, सुबह जल्दी पिकअप और पुणे तक वापसी का ट्रांसपोर्ट।
1. कालू झरना, माळशेज घाट (आसान)
माळशेज क्षेत्र का सबसे ऊँचा और सबसे बड़ा झरना, जो लगभग 1200 फ़ीट से गिरता है। इसका करीब 90% हिस्सा सड़क से छिपा रहता है, इसलिए पूरा नज़ारा सिर्फ़ ट्रेकर्स को मिलता है। यह हरिश्चंद्रगढ़ से निकलकर खिरेश्वर गाँव से होकर बहता है। नए ट्रेकर्स के लिए सबसे अच्छा। सीज़न: जुलाई से अक्टूबर, मानसून में पूरे ज़ोर पर। कालू झरना ट्रेक
2. देवकुंड झरना, भिरा (आसान से मध्यम)
“भगवान का कुंड”: एक कुंड जहाँ तीन झरने मिलते हैं, जिसे कुंडलिका नदी का उद्गम माना जाता है। भिरा से जंगल की पगडंडी पर नाले पार करने पड़ते हैं, एक झूलता पुल है और कुंडलिका घाटी के नज़ारे हैं। देवकुंड ट्रेक · देवकुंड गाइड
3. अंधारबन जंगल ट्रेक, ताम्हिणी घाट (आसान से मध्यम)
अंधारबन का मतलब है “अँधेरा जंगल”। यह धीरे-धीरे उतरने वाला ट्रेक है, जो पिंपरी गाँव के पास लगभग 2100 फ़ीट से शुरू होता है। रास्ते में झरने और तीन बड़े नाले पार करने पड़ते हैं, और रिज से कुंडलिका घाटी और भिरा बाँध दिखते हैं। मालाबार व्हिसलिंग थ्रश और मानसून के दूसरे पक्षियों पर नज़र रखें। अंधारबन ट्रेक
4. आडराई जंगल ट्रेक, माळशेज घाट (आसान से मध्यम)
माळशेज घाट के पास लगभग 7.5 किमी की घने जंगल वाली पदयात्रा, जिसमें खिरेश्वर घाटी और कालू झरने के नज़ारे हैं, साथ में नागेश्वर मंदिर और गुफाएँ भी। बारिश में माळशेज की ड्राइव ही आधा मज़ा है। आडराई ट्रेक
5. कोरीगढ़ किला और सावल्या घाट (मध्यम)
लोनावला के पास डबल ट्रेक: पहले कोरीगढ़ किले की अच्छी तरह बची प्राचीर, मंदिर और तालाब, फिर झरनों और जंगल से होकर कम जाना-पहचाना सावल्या घाट। अगर आप पहले एक-दो ट्रेक कर चुके हैं तो सबसे अच्छा। कोरीगढ़ और सावल्या घाट ट्रेक
6. रायरेश्वर और केंजलगढ़ (आसान)
एक ही दिन में इतिहास और मानसून के नज़ारे: केंजलगढ़ किले की चट्टान में तराशी सीढ़ियाँ और रायरेश्वर पठार, जहाँ छत्रपति शिवाजी महाराज ने 1645 में हिंदवी स्वराज्य की शपथ ली थी। रायरेश्वर और केंजलगढ़ ट्रेक
7. भीमाशंकर से भोरगिरी जंगल ट्रेल (आसान)
भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के दर्शन, फिर भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य से होकर भोरगिरी गाँव तक उतराई, रास्ते में नाले, झरने और गुप्त भीमाशंकर के दर्शन। यह जंगल महाराष्ट्र के राज्य पशु शेकरू का घर है। भीमाशंकर–भोरगिरी ट्रेक
मानसून सुरक्षा, संक्षेप में
- सच में अच्छी पकड़ वाले जूते पहनें। मानसून में चट्टानें फिसलन भरी होती हैं।
- छाता नहीं, रेनकोट या पोंचो रखें: दोनों हाथ ख़ाली चाहिए।
- तेज़ बारिश के बाद नालों का पानी जल्दी बढ़ता है। ट्रेक लीडर का फ़ैसला अंतिम है, और रास्ता बदला या छोटा किया जा सकता है।
- घर लौटने के सफ़र के लिए सूखे कपड़ों का एक जोड़ा रखें।
पक्का नहीं कि कौन-सा ट्रेक आपके लिए सही है? पढ़ें अपनी फ़िटनेस के हिसाब से सही ट्रेक कैसे चुनें, या हमारे सभी ट्रेक देखें।